Tuesday, May 1, 2012

सत्य

चले गए बहुत से लोग

कुछ समय से गये,कुछ असमय ही चले गए

चाची,भैया,पिता जी

सगीर नाइ,सैय्यद सलार

सब चले गए इस दुनिया के पार

डाकू,ज़ालिम,तानाशाह

सोचते होंगें, कभी नहीं जाएंगे

ज़ुल्म करते हुए

पर मृत्यु उन्हें भी ले गयी अपने साथ

एक दिन हम भी महसूसेंगे

उसका ठंडा स्पर्श (बकौल जेम्स शर्ली)

उसकी गहरी फुसफुसाहट

कि आओ चलो हमारे साथ

पर अभी,

अभी तो,शहर-ऐ-ख़ामोशां में

बेर के पेड़ पर चिड़ियाँ चह चहा रहीं हैं

आओ सुने,वो जीवन के गीत गा रहीं हैं।।